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QUESTIONING ELECTORAL INTEGRITY: THE HIDDEN CRISIS IN BANGLADESH’S ‘UNPRECEDENTED’ ELECTION
किसी भी राष्ट्र में चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन की प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं होते, ये दरअसल राज्य और नागरिक के बीच सामाजिक अनुबंध का नवीनीकरण का क्षण होते हैं। जब कोई चुनाव आधिकारिक मंच से “इतिहास का सर्वश्रेष्ठ” और “अभूतपूर्व” घोषित किया जाता है, तो पहली नजर में लगता है कि सब ठीक है, लेकिन असलियत कुछ और ही कहती है। अगर जमीनी स्तर पर मतदान केंद्र खाली हों, मतदाताओं की कतारें न हों, कर्मचारी अपने फोन पर ध्यान लगाएँ या चाय पीते रहें, और बावजूद इसके मतपेटियाँ भरती रहें, तो यह सिर्फ

S.S.TEJASKUMAR
Feb 254 min read


