U.S.-IRAN NEGOTIATIONS: NUCLEAR DELAY, REGIONAL POWER DYNAMICS, AND THE DIPLOMATIC CHALLENGES OF AN INTERIM AGREEMENT
- S.S.TEJASKUMAR

- Feb 24
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परमाणु प्रसार, क्षेत्रीय शक्ति संतुलन, मिसाइल प्रतिरोध की रणनीति, प्रॉक्सी युद्ध और ईरान की आंतरिक अस्थिरता जैसे कई जटिल तत्व एक साथ काम कर रहे हैं। 22 फरवरी को एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने संकेत दिया कि 26 फरवरी को जेनेवा में होने वाली तीसरे दौर की वार्ता में अमेरिका और ईरान के बीच एक संभावित “अंतरिम समझौते” पर चर्चा हो सकती है [i]। ऊपर से देखने पर यह एक व्यावहारिक कूटनीतिक रास्ता लगता है, लेकिन अगर इसे रणनीतिक और वैज्ञानिक नजरिए से देखें तो तस्वीर अलग दिखाई देती है। यदि यह समझौता केवल परमाणु कार्यक्रम तक सीमित रहता है, तो यह ईरान को समय हासिल करने का अवसर देगा। असली सवाल केवल यूरेनियम संवर्धन (enrichment) के प्रतिशत का नहीं है, बल्कि “ब्रेकआउट टाइम” का है—यानी वह समय जिसमें कोई देश हथियार-ग्रेड यूरेनियम (लगभग 90% U-235) तैयार कर सकता है। IAEA की पिछली तकनीकी रिपोर्टें बताती हैं कि 60% तक संवर्धित यूरेनियम को 90% तक ले जाना अपेक्षाकृत तेज प्रक्रिया है, क्योंकि अधिकांश सेपरेटिव वर्क यूनिट (SWU) का काम पहले ही हो चुका होता है [vi]। इसलिए यदि किसी समझौते के तहत ईरान को सीमित या प्रतीकात्मक संवर्धन की अनुमति मिलती है, तो वह तकनीकी रूप से “थ्रेशहोल्ड स्टेट” की स्थिति में बना रह सकता है—यानी घोषित परमाणु शक्ति नहीं, लेकिन क्षमता के बिल्कुल करीब।
रॉयटर्स को एक ईरानी अधिकारी ने स्वीकार किया कि अंतरिम समझौते की संभावना मौजूद है [ii], जबकि ईरानी विदेश मंत्रालय ने औपचारिक रूप से इसे नकार दिया [iii]। यह विरोधाभास अपने आप में एक रणनीतिक संकेत है—बाहर की दुनिया को लचीलापन दिखाना और घरेलू राजनीति में कठोर रुख बनाए रखना। इज़राइली मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका एक बहु-चरणीय समझौते पर विचार कर रहा है, जिसमें पहले चरण में केवल परमाणु मुद्दे और बाद के चरणों में बैलिस्टिक मिसाइल तथा “एक्सिस ऑफ रेज़िस्टेंस” पर चर्चा हो सकती है [iv]। लेकिन यह मॉडल ईरान को अपनी मिसाइल क्षमता और प्रॉक्सी नेटवर्क सुरक्षित रखने का मौका देता है। CTP-ISW के आकलन के अनुसार ईरान गैर-परमाणु मुद्दों को वार्ता में शामिल कर बातचीत को लंबा खींच सकता है ताकि संभावित अमेरिकी सैन्य कार्रवाई टाली जा सके [v]। समय यहाँ सबसे महत्वपूर्ण संसाधन है—हर अतिरिक्त महीना ईरान को फोर्डो और नतांज़ जैसे भूमिगत परमाणु स्थलों को और मजबूत करने, उन्नत IR-6 और IR-8 सेंट्रीफ्यूज लगाने तथा यूरेनियम धातुकरण जैसे संवेदनशील प्रयोगों को आगे बढ़ाने का अवसर देता है [vi]।
अमेरिका की घोषित “शून्य संवर्धन” की मांग इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण है। खबर है कि सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारिजानी ओमान के माध्यम से अमेरिकी मांगों का आधिकारिक जवाब देने वाले हैं [vii]। वहीं विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान को शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम और संवर्धन का अधिकार है [viii]। लेकिन परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के तहत यह अधिकार बिना शर्त नहीं है; यह IAEA की निगरानी और पारदर्शिता से जुड़ा हुआ है। रॉयटर्स के अनुसार ईरान आधा उच्च-संवर्धित यूरेनियम विदेश भेजने और शेष को पतला करने पर विचार कर सकता है, यदि अमेरिका संवर्धन के अधिकार को मान्यता दे और प्रतिबंध हटाए [ix]। सुनने में यह संतुलित प्रस्ताव लगता है, लेकिन यदि सेंट्रीफ्यूज ढांचा, तकनीकी ज्ञान और उत्पादन क्षमता बरकरार रहती है, तो ब्रेकआउट टाइम बहुत कम रह सकता है। स्टीव विटकॉफ ने पुष्टि की कि ट्रम्प की “रेड लाइन” शून्य संवर्धन है [x]। यदि ऐसा है, तो किसी भी प्रकार का प्रतीकात्मक संवर्धन इस घोषित नीति से समझौता होगा।
कुछ रिपोर्टों में “टोकन एनरिचमेंट” या केवल चिकित्सा उपयोग के लिए सीमित संवर्धन की बात कही गई है [xi][xii]। लेकिन परमाणु विज्ञान के दृष्टिकोण से देखें तो 3.67% या 5% का संवर्धन भी यदि औद्योगिक पैमाने पर लगातार जारी रहे, तो तकनीकी क्षमता को जिंदा रखता है। 20% संवर्धन ऐतिहासिक रूप से हथियार-पूर्व चरण माना गया है। इसलिए असली सवाल प्रतिशत का नहीं, बल्कि सेंट्रीफ्यूज की संख्या, उनकी दक्षता (SWU क्षमता) और निरीक्षण प्रणाली की कठोरता का है।
ईरानी नेतृत्व के भीतर यह सोच भी हो सकती है कि अमेरिका के सामने झुकना सैन्य टकराव से अधिक खतरनाक साबित होगा [xiii][xiv]। ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलें—शाहाब, सेज्जिल, खुर्रमशहर—उसकी प्रतिरोध रणनीति की रीढ़ हैं। पूर्व IRGC कमांडर मोहम्मद अली जाफरी ने स्वीकार किया था कि ईरान ने जानबूझकर मिसाइल और ड्रोन कार्यक्रम को प्राथमिकता दी ताकि अमेरिका और इज़राइल की वायु श्रेष्ठता का मुकाबला किया जा सके [xvi]। इसे असममित प्रतिरोध (asymmetric deterrence) कहा जाता है—जब पारंपरिक सैन्य संतुलन संभव न हो, तो लंबी दूरी की सटीक मारक क्षमता से संतुलन बनाया जाता है। यदि अमेरिका मिसाइल कार्यक्रम को वार्ता में शामिल करता है, तो वह केवल सैन्य तकनीक नहीं, बल्कि ईरान की पूरी सुरक्षा अवधारणा को चुनौती देगा।
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार ट्रम्प प्रशासन सीमित सैन्य हमले के विकल्प पर विचार कर रहा है ताकि ईरान पर दबाव डाला जा सके [xvii][xviii]। इसे “कम्पेलेंस स्ट्रैटेजी” कहा जाता है—सीमित बल प्रयोग से राजनीतिक रियायत लेने की कोशिश। लेकिन इतिहास बताता है कि सीमित हमले कई बार प्रतिरोध को और कठोर बना देते हैं। यदि शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाने जैसे विकल्पों पर चर्चा हो रही है [xix], तो यह संघर्ष को अस्तित्वगत रूप दे सकता है। USS Gerald R. Ford जैसे कैरियर स्ट्राइक ग्रुप की तैनाती [xxi] केवल शक्ति प्रदर्शन नहीं, बल्कि स्पष्ट संदेश है कि अमेरिका बहु-डोमेन सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार है।
ईरान के भीतर हालिया छात्र-नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शन [xxii][xxiii] यह दिखाते हैं कि घरेलू असंतोष गहरा है। 2022-23 के महसा अमीनी आंदोलन की याद अभी भी ताजा है [xxvii]। राजनीतिक सिद्धांत कहता है कि जब शासन आंतरिक वैधता खोता है, तो वह बाहरी खतरे का उपयोग राष्ट्रवादी एकजुटता के लिए कर सकता है। लारिजानी की बढ़ती भूमिका और सत्ता संरचना में बदलाव [xxxii][xxxiv] यह संकेत देते हैं कि ईरान संभावित दीर्घकालिक टकराव और उत्तराधिकार की राजनीति दोनों के लिए तैयारी कर रहा है।
लेबनान में हिज़्बुल्लाह के मिसाइल नेटवर्क पर IDF के हमले [lviii][lxi] केवल सामरिक कार्रवाई नहीं, बल्कि संभावित भविष्य के संघर्ष की तैयारी भी हैं। हिज़्बुल्लाह के पास बड़ी संख्या में शॉर्ट और लॉन्ग रेंज मिसाइलें हैं [lxxiv]। यदि अमेरिका-ईरान संघर्ष होता है, तो इज़राइल पर बहु-दिशात्मक हमले संभव हैं [lxvi][lxvii]। इसी तरह इराकी मिलिशिया और यमन के हूती भी सक्रिय हो सकते हैं [lxxxv][cxii]। यह पूरा “Axis of Resistance” एक नेटवर्क आधारित संरचना है—एक मोर्चा दबे तो दूसरा सक्रिय हो सकता है।
इन सभी तथ्यों को जोड़कर देखें तो स्पष्ट है कि केवल संवर्धन प्रतिशत पर आधारित कोई भी अंतरिम समझौता समस्या का समाधान नहीं करेगा। जब तक सेंट्रीफ्यूज अवसंरचना, मिसाइल डिलीवरी सिस्टम और प्रॉक्सी नेटवर्क बने हुए हैं, ईरान “न्यूक्लियर लेटेंसी” की स्थिति में रहेगा—हथियार घोषित नहीं, पर क्षमता सुरक्षित। यदि अमेरिका वास्तव में शून्य संवर्धन चाहता है, तो उसे या तो पूर्ण निरस्त्रीकरण मॉडल अपनाना होगा या बेहद कठोर और त्वरित निरीक्षण तंत्र लागू करना होगा। अन्यथा अंतरिम समझौता केवल समय का विस्तार होगा—और इस पूरे संघर्ष में समय ही सबसे निर्णायक तत्व है।
संदर्भ
[i] Axios, 22 February.
[ii] Reuters, 22 February.
[iii] Iranian MFA Statement, 22 February.
[iv] Israeli Media Reports, 22 February.
[v] CTP-ISW Assessment.
[vi] IAEA Technical Reports on Enrichment.
[vii] Regional Diplomatic Sources.
[viii] Face the Nation Interview, 22 February.
[ix] Reuters Diplomatic Source.
[x] Fox News Interview, 21 February.
[xi] Axios Report, 22 February.
[xii] New York Times Report.
[xiii] Fox News Source Briefing.
[xiv] Iranian Official Statements on Missiles.
[xv] Strategic Studies on Iranian Deterrence Doctrine.
[xvi] Statement by Mohammad Ali Jafari, October 2025.
[xvii] New York Times, 22 February.
[xviii] Ibid.
[xix] Axios, 20 February.
[xxi] US Naval Deployment Reports.
[xxii–xxvii] CTP-ISW Protest Tracking Data.
[lviii–lxxix] IDF and Regional Security Reports.
[lxxxv–ciii] Iraqi Militia Activity Reports.
[cxii–cxiv] Yemeni and Regional Media Reports.

























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