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EXPORT PROMOTION MISSION: STRENGTHENING INDIA’S GLOBAL TRADE COMPETITIVENESS.


भारत का निर्यात क्षेत्र आज वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में निर्णायक भूमिका निभा रहा है, और इसे सुदृढ़ करने के लिए केंद्र सरकार ने निर्यात संवर्धन मिशन (Export Promotion Mission – EPM) की शुरुआत की है। यह मिशन केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि भारत की माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSMEs) के लिए एक समग्र, डेटा-संवर्धित और वैज्ञानिक रूप से डिज़ाइन किया गया कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य निर्यातकों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना और भारतीय वस्तुओं एवं सेवाओं की अंतरराष्ट्रीय पहुँच को व्यापक बनाना है [1]।


ईपीएम के तहत कुल 10 हस्तक्षेप अब पूरी तरह से कार्यान्वित हो चुके हैं, जिनमें वित्तीय और गैर-वित्तीय समर्थन दोनों शामिल हैं। यह मिशन दो एकीकृत उप-योजनाओं, निर्यात प्रोत्साहन (Niryat Protsahan) और निर्यात दिशा (Niryat Disha) के माध्यम से कार्य करता है, जो क्रमशः वित्तीय और बाजार-संबंधी बाधाओं को दूर करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। निर्यातकों को व्यापार वित्त, निर्यात अनुपालन, लॉजिस्टिक्स, विदेशी भंडारण और बाजार पहुंच जैसी कई समस्याओं में सहारा प्रदान करना इसका केंद्रीय उद्देश्य है।


वित्तीय पहलू की बात करें तो Niryat Protsahan MSME निर्यातकों को वैकल्पिक व्यापार-फाइनेंस उपकरण प्रदान करता है। उदाहरण के लिए, एक्सपोर्ट फैक्टोरिंग (Export Factoring) के माध्यम से निर्यातक अपने प्राप्तियों को तुरंत नकदी में बदल सकते हैं, जिससे कार्यशील पूंजी (Working Capital) में वृद्धि होती है और भुगतान जोखिम कम होता है [2]। इस intervention में 2.75% की ब्याज सबवेंशन की व्यवस्था है, जो ₹50 लाख तक सीमित है। इसके अतिरिक्त, ई-कॉमर्स निर्यातकों के लिए क्रेडिट सहायता भी प्रदान की जाती है, जिसमें 90% तक की गारंटी कवरेज उपलब्ध है और ₹5 करोड़ तक की सीमा है। यह वैश्विक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर MSMEs को प्रतिस्पर्धी बनाए रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।


निर्यातकों के लिए जोखिम साझा करने वाले उपकरण भी इस मिशन का हिस्सा हैं। Emerging Export Opportunities के तहत, उच्च जोखिम वाले बाजारों में निर्यात बढ़ाने के लिए 10% से 90% तक के जोखिम साझा करने की सुविधा दी जाती है। यह एक अत्यंत वैज्ञानिक और गणितीय रूप से परिकलित मॉडल पर आधारित है, जिसमें देशवार, निर्यातकवार, लेन-देनवार और बैंकवार जोखिम सीमाएँ तय की गई हैं। यह सुनिश्चित करता है कि वित्तीय जोखिम का केंद्रीकरण न हो और सभी हितधारक सुरक्षित रूप से वैश्विक व्यापार में भाग ले सकें।


पहले से चल रही interventions में प्री- और पोस्ट-शिपमेंट क्रेडिट पर ब्याज सबवेंशन और संपार्श्विक मुक्त क्रेडिट गारंटी शामिल हैं। प्री- और पोस्ट-शिपमेंट क्रेडिट पर 2.75% की सबवेंशन देकर MSMEs की कार्यशील पूंजी लागत कम की जाती है। संपार्श्विक मुक्त क्रेडिट गारंटी के माध्यम से माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइजेज को 85% और मीडियम एंटरप्राइजेज को 65% कवरेज दी जाती है, जिससे वित्तीय बाधाएँ न्यूनतम हो जाती हैं।


Niryat Disha के तहत, गैर-वित्तीय और बाजार-संबंधी बाधाओं को दूर किया जाता है। TRACE (Trade Regulations, Accreditation and Compliance Enablement) intervention के माध्यम से निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय मानकों, ISO, FDA, CE मार्किंग जैसी आवश्यक प्रमाणपत्र प्राप्त करने में वित्तीय सहायता दी जाती है, जिससे वैश्विक बाजार में प्रवेश आसान होता है। Priority Positive List के तहत BRCGS, FSSC 22000, HACCP जैसी उच्च लागत वाली रणनीतिक प्रमाणपत्रों के लिए 75% तक वित्तीय समर्थन दिया जाता है। इस प्रकार, भारत के निर्यातक न केवल उत्पादक क्षमता बल्कि गुणवत्ता मानकों में भी वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन रहे हैं [3]।


लॉजिस्टिक्स और परिवहन में सुधार के लिए LIFT (Logistics Interventions for Freight and Transport) के माध्यम से MSMEs को उनके भौगोलिक नुकसान और आंतरिक कनेक्टिविटी की कमी को कम करने में सहायता मिलती है। eligible shipments पर 30% तक वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है, जिससे ₹20 लाख तक की सीमा होती है। इसके अतिरिक्त, FLOW (Facilitating Logistics, Overseas Warehousing and Fulfilment) intervention विदेशी भंडारण, वितरण और पूर्ति सुविधाओं तक पहुँच प्रदान करता है, जिससे निर्यात प्रक्रिया तेज, विश्वसनीय और कम लागत वाली बनती है।


INSIGHT (Integrated Support for Trade Intelligence and Facilitation) intervention के माध्यम से निर्यातक बाज़ार और उत्पाद विश्लेषण, प्रशिक्षण, जिला और क्लस्टर-स्तरीय सहायता, अनुसंधान और नवाचार में वित्तीय समर्थन प्राप्त करते हैं। यह intervention सीधे डेटा-संचालित निर्णय लेने की प्रक्रिया को मजबूत करता है और वैश्विक बाजार की जानकारी में पारदर्शिता लाता है।


Market Access Support (MAS) intervention के तहत Buyer-Seller Meets, Trade Fairs, Trade Delegations और Reverse Buyer Seller Meets में ₹5 करोड़ से ₹10 करोड़ तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। इससे भारतीय उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय दृश्यता बढ़ती है और बाजार विविधीकरण संभव होता है।


EPM मिशन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह पूरे सरकार के दृष्टिकोण को एकीकृत करता है। नीति समर्थन, वित्तीय उपकरण, बाजार तैयारियों और खरीदार कनेक्टिविटी को एक ही संस्थागत ढांचे में समेटकर यह fragmented support को समाप्त करता है और MSMEs के लिए निर्यात वृद्धि को वैज्ञानिक रूप से सुनिश्चित करता है। यह मिशन केवल वित्तीय राहत या बाजार पहुंच नहीं देता, बल्कि डेटा-संचालित रणनीतिक निर्णय, गुणवत्ता और लॉजिस्टिक्स दक्षता के माध्यम से स्थायी निर्यात वृद्धि को संभव बनाता है।


इस मिशन के परिणामस्वरूप भारत का MSME निर्यातक वर्ग उच्च जोखिम वाले वैश्विक बाजारों में भी प्रतिस्पर्धात्मक रूप से स्थिर हो रहा है। कार्यशील पूंजी की उपलब्धता, ब्याज सबवेंशन, संपार्श्विक मुक्त क्रेडिट और जोखिम साझा करने के उपकरणों के कारण, यह मिशन वित्तीय रूप से अधिक सशक्त और वैज्ञानिक रूप से संरचित है। साथ ही, TRACE, LIFT, FLOW और INSIGHT जैसे interventions निर्यातकों को गैर-वित्तीय बाधाओं से मुक्त करते हैं और वैश्विक बाजार में उनकी दृश्यता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाते हैं।


समग्र रूप से, निर्यात संवर्धन मिशन भारत के निर्यातकों को वित्तीय, तकनीकी और बाजार-संबंधी तीनों स्तर पर सशक्त बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह मिशन MSMEs को न केवल वैश्विक व्यापार में प्रवेश दिलाता है, बल्कि उन्हें स्थायी, डेटा-संचालित और जोखिम-मुक्त वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बनाए रखने के लिए रणनीतिक रूप से सशक्त बनाता है। इसे लागू करने में केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य और जिला अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों, Export Promotion Councils और भारत के मिशनों की समन्वित भागीदारी सुनिश्चित करती है। इस मिशन के माध्यम से भारत वैश्विक निर्यात परिदृश्य में केवल एक प्रतिभागी नहीं, बल्कि एक निर्णायक शक्ति के रूप में उभर रहा है।


EPM की सफलता का वैज्ञानिक और तर्कसंगत विश्लेषण यह दर्शाता है कि वित्तीय सबवेंशन, जोखिम प्रबंधन उपकरण, गैर-वित्तीय बाजार सुलभता interventions और डेटा-संचालित नीति समर्थन, सभी मिलकर निर्यातकों के लिए एक मजबूत, सुसंगठित और उच्च प्रतिस्पर्धात्मक ढांचा तैयार करते हैं। इसके बिना, MSMEs वैश्विक बाजार में केवल छोटे और असुरक्षित खिलाड़ी रह जाते। EPM ने इसे बदल दिया है, और भारत के निर्यात क्षेत्र को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया है, जिससे आर्थिक वृद्धि, रोजगार सृजन और वैश्विक बाजार में भारत की रणनीतिक पकड़ मजबूत होती है।



Intervention

उद्देश्य

वित्तीय सहायता

लाभार्थी / लाभ का प्रकार

केस स्टडी / उदाहरण

Export Factoring

MSME के लिए कार्यशील पूंजी और भुगतान जोखिम कम करना

2.75% ब्याज सबवेंशन, ₹50 लाख तक

MSME निर्यातक

गुजरात के एक textile MSME ने तत्काल नकदी प्राप्त कर उत्पादन बढ़ाया

E-Commerce Credit Facility

ई-कॉमर्स निर्यातकों के लिए क्रेडिट उपलब्ध कराना

Direct Facility: 90% गारंटी, ₹50 लाख; Overseas Inventory: 75% गारंटी, ₹5 करोड़ तक

MSME ई-कॉमर्स निर्यातक

दिल्ली के electronics MSME ने यूरोप और अमेरिका के लिए स्टॉक बढ़ाया

Emerging Export Opportunities

नए/उच्च जोखिम बाजारों में विस्तार

10–90% जोखिम साझा उपकरण

MSME निर्यातक

अफ्रीका में food processing मशीन निर्यात, जोखिम 50% साझा

Interest Subvention (Pre/Post Shipment)

क्रेडिट लागत कम करना

2.75% ब्याज सबवेंशन, ₹50 लाख तक

MSME निर्यातक

जनवरी 2026 तक 3,000 निर्यातकों ने लाभ लिया

Collateral-Free Export Credit

संपार्श्विक बाधाओं को दूर करना

65–85% गारंटी कवरेज, ₹10 करोड़ तक

MSME निर्यातक

MSME leather exporter ने बिना गारंटी बैंक से ₹7 करोड़ लिया

TRACE

अंतरराष्ट्रीय प्रमाणपत्र और अनुपालन सहायता

Positive List: 60% या ₹25 लाख; Priority List: 75% या ₹25 लाख

MSME निर्यातक

HACCP प्रमाणपत्र, ₹20 लाख की लागत में 75% सहायता

LIFT

लॉजिस्टिक्स लागत कम करना

30% तक, ₹20 लाख प्रति वर्ष

MSME निर्यातक

उत्तर प्रदेश के textile cluster ने रेल मार्ग से लागत 40% कम की

FLOW

विदेशी भंडारण और fulfilment

Warehousing: ₹10 करोड़ या 30%; Fulfilment: ₹5 लाख/माह या 30%

MSME निर्यातक

यूरोप में warehouse के माध्यम से डिलीवरी समय 25–30% घटा

INSIGHT

Trade intelligence और capacity building

50% project cost (सरकारी 100%)

सभी निर्यातक

महाराष्ट्र textile MSME ने यूरोप के 3 नए बाजारों में प्रवेश किया

MAS

Market Access Support

₹5–10 करोड़ per event

MSME निर्यातक

दिल्ली leather exporters ने जर्मनी और इटली में ₹25 करोड़ के नए deals किए




[1] Ministry of Commerce & Industry, Government of India, Export Promotion Mission (EPM) Framework, 2025

[2] EXIM Bank of India, MSME Export Financing Reports, 2025–2026

[3] DGFT Guidelines on TRACE, Priority Positive List, 2025



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