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SOUTHERN SURGE OF PROGRESS: INFRASTRUCTURE, INNOVATION AND INCLUSIVE GROWTH SHAPING BHARAT’S NEXT DEVELOPMENT HORIZON

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का 1 मार्च 2026 को तमिलनाडु और पुडुचेरी का प्रस्तावित दौरा केवल परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास तक सीमित एक प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह भारत के समकालीन विकास-चिंतन, अवसंरचनात्मक पुनरुत्थान, समुद्री-तटीय अर्थनीति, हरित-प्रौद्योगिकी संक्रमण, सामाजिक समावेशन, और सांस्कृतिक आत्मविश्वास की बहुस्तरीय अभिव्यक्ति है। यह यात्रा उस व्यापक राष्ट्रीय दृष्टि का विस्तार है जिसमें अवसंरचना को केवल कंक्रीट और इस्पात का ढांचा नहीं, बल्कि उत्पादकता, मानवीय पूंजी, क्षेत्रीय संतुलन, जलवायु-लचीलापन और भू-रणनीतिक सुदृढ़ता का आधार माना गया है। लगभग 2,700 करोड़ रुपये के विकास कार्य पुडुचेरी में और 4,400 करोड़ रुपये से अधिक के अवसंरचनात्मक निवेश मदुरै एवं आसपास के क्षेत्रों में, भारत के उस दीर्घकालिक विकास प्रतिमान की पुष्टि करते हैं जिसमें ‘कनेक्टिविटी = उत्पादकता = समृद्धि’ का समीकरण केंद्रीय भूमिका निभाता है।


पुडुचेरी में ई-बस सेवा का शुभारंभ, समेकित कमांड एवं नियंत्रण केंद्र, सीआईटीआईआईएस के अंतर्गत आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आवास, जलापूर्ति एवं सीवरेज परियोजनाएँ, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान कराईकल में डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम समेकित अभियांत्रिकी ब्लॉक, जिपमर के क्षेत्रीय कैंसर केंद्र का आधुनिकीकरण, पांडिचेरी विश्वविद्यालय के शैक्षणिक अधोसंरचना विस्तार—ये सभी घटक उस वैज्ञानिक समझ को मूर्त रूप देते हैं कि शहरीकरण यदि डेटा-आधारित, संसाधन-कुशल और सामाजिक रूप से समावेशी हो, तो वह दीर्घकालिक आर्थिक प्रगति का इंजन बन सकता है। विश्व बैंक और ओईसीडी की शहरी उत्पादकता संबंधी रिपोर्टों ने स्पष्ट किया है कि सुव्यवस्थित सार्वजनिक परिवहन, डिजिटल निगरानी और जल-अपशिष्ट प्रबंधन में सुधार, प्रति व्यक्ति आय में स्थायी वृद्धि और स्वास्थ्य-व्यय में कमी से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े होते हैं। भारत की स्मार्ट सिटी मिशन रिपोर्टें भी दर्शाती हैं कि आईसीसीसी आधारित निगरानी से अपराध दर में कमी, आपदा-प्रबंधन की प्रतिक्रिया-समय में सुधार और यातायात दक्षता में वृद्धि हुई है।


ई-बस पहल को यदि व्यापक ऊर्जा-सुरक्षा और जलवायु-रणनीति के संदर्भ में देखा जाए तो यह केवल परिवहन-उन्नयन नहीं, बल्कि भारत की राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDCs) के अनुरूप ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन तीव्रता में कमी का एक व्यावहारिक साधन है। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) की 2023 की रिपोर्ट बताती है कि सार्वजनिक परिवहन के विद्युतीकरण से शहरी परिवहन उत्सर्जन में 30–40% तक कमी लाई जा सकती है, बशर्ते ग्रिड में नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़े। भारत में सौर और पवन ऊर्जा क्षमता में तीव्र वृद्धि, और बैटरी भंडारण की लागत में गिरावट (ब्लूमबर्गNEF, 2024) ई-गतिशीलता को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बना रही है। पुडुचेरी जैसे अपेक्षाकृत छोटे, घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्र में ई-बसों का परिचालन, परिचालन-लागत में कमी, वायु-गुणवत्ता में सुधार और स्वास्थ्य-लाभ के माध्यम से बहुगुणित सामाजिक प्रतिफल उत्पन्न करेगा।


समेकित कमांड एवं नियंत्रण केंद्र शहरी शासन को डेटा-संचालित बनाते हैं। रियल-टाइम सीसीटीवी विश्लेषण, ट्रैफिक प्रबंधन, जल-स्तर निगरानी, आपदा चेतावनी प्रणाली—ये सभी कृत्रिम बुद्धिमत्ता और बिग-डेटा विश्लेषण पर आधारित हैं। संयुक्त राष्ट्र-हैबिटैट के अनुसार, स्मार्ट शहरी प्रबंधन से आपात स्थितियों में प्रतिक्रिया समय 20–35% तक घटाया जा सकता है। पुडुचेरी, जो चक्रवात-प्रभावित तटीय क्षेत्र है, वहाँ यह तंत्र आपदा-जोखिम न्यूनीकरण (DRR) की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह ‘सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल 11’—सतत एवं लचीले शहर—की दिशा में ठोस कदम है।


जिपमर के क्षेत्रीय कैंसर केंद्र का आधुनिकीकरण, भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य-रणनीति के वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य को दर्शाता है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के अनुमानों के अनुसार, भारत में 2025 तक कैंसर के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है, विशेषकर तंबाकू-संबंधी और जीवनशैली-जनित कैंसर। क्षेत्रीय कैंसर केंद्रों की क्षमता-वृद्धि, रेडियोथेरेपी मशीनों, लीनियर एक्सीलेरेटर, और ऑन्को-डायग्नोस्टिक प्रयोगशालाओं के आधुनिकीकरण से उपचार-सुलभता बढ़ेगी। स्वास्थ्य-अर्थशास्त्र के अध्ययनों से ज्ञात होता है कि समय पर निदान और उपचार, रोग-भार (DALYs) में कमी लाकर उत्पादक कार्य-घंटों की रक्षा करते हैं, जिससे GDP पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।


करासुर-सेदारापेट औद्योगिक एस्टेट का 750 एकड़ में विकास, जिसमें फार्मा पार्क, टेक्सटाइल पार्क, आईटी पार्क, आईआईटी मद्रास का अत्याधुनिक अनुसंधान केंद्र और जिपमर की उन्नत स्वास्थ्य सुविधाएँ सम्मिलित होंगी, ‘क्लस्टर-आधारित औद्योगिकरण’ के सिद्धांत पर आधारित है। माइकल पोर्टर के क्लस्टर सिद्धांत के अनुसार, जब उद्योग, अनुसंधान संस्थान और कौशल-केंद्र भौगोलिक रूप से निकट होते हैं, तो नवाचार, प्रतिस्पर्धात्मकता और निर्यात क्षमता में वृद्धि होती है। भारत की फार्मा इंडस्ट्री, जो वैश्विक जेनेरिक दवाओं का लगभग 20% आपूर्ति करती है (फार्मास्यूटिकल्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल डेटा), यदि क्षेत्रीय स्तर पर R&D और विनिर्माण को एकीकृत करती है, तो वह उच्च-मूल्य बायोटेक और जटिल जेनेरिक में आगे बढ़ सकती है। पुडुचेरी का यह पार्क दक्षिण भारत के फार्मा-निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करेगा।


प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत ग्रामीण सड़कों का निर्माण, केवल परिवहन-सुविधा नहीं बल्कि सामाजिक-आर्थिक गतिशीलता का साधन है। विश्व बैंक के अध्ययनों में पाया गया है कि ग्रामीण सड़कों की उपलब्धता से कृषि-उत्पादों के बाजार तक पहुँच बढ़ती है, विद्यालय-उपस्थिति में सुधार होता है और मातृ-स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच आसान होती है। 41 ग्रामीण सड़कों का निर्माण, क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने की दिशा में एक संरचनात्मक हस्तक्षेप है।


मिष्टी योजना के अंतर्गत मैंग्रोव पुनर्स्थापन, जलवायु-लचीलापन और तटीय पारिस्थितिकी की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। वैज्ञानिक शोध (Nature Climate Change, 2022) दर्शाते हैं कि मैंग्रोव वन प्रति हेक्टेयर कार्बन-भंडारण की दृष्टि से उष्णकटिबंधीय वनों से भी अधिक प्रभावी हो सकते हैं। वे चक्रवातीय तूफानों की तीव्रता को कम करते हैं और तटीय कटाव को रोकते हैं। पुडुचेरी और तमिलनाडु का तटीय भूगोल, जो बंगाल की खाड़ी के चक्रवातों से प्रभावित होता है, वहाँ मैंग्रोव पुनर्जीवन दीर्घकालिक आपदा-जोखिम न्यूनीकरण का वैज्ञानिक समाधान है।


विशेष सहायता योजना के अंतर्गत पूंजीगत निवेश की स्वीकृति, संघीय ढांचे में सहयोगात्मक संघवाद का उदाहरण है। पूंजीगत व्यय का गुणक प्रभाव (Fiscal Multiplier) भारतीय रिज़र्व बैंक और विभिन्न आर्थिक सर्वेक्षणों में 2.5 से अधिक आँका गया है, अर्थात एक रुपये के सार्वजनिक पूंजीगत निवेश से दीर्घकाल में 2.5 रुपये से अधिक की आर्थिक गतिविधि उत्पन्न हो सकती है।


मदुरै में 4,400 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएँ, विशेषकर राष्ट्रीय राजमार्गों का चौड़ीकरण, प्रधानमंत्री गति शक्ति मास्टर प्लान की अवधारणा को मूर्त रूप देते हैं। मरक्कनम–पुडुचेरी और परमकुडी–रामनाथपुरम खंडों का चार-लेनीकरण, यात्रा-समय में 40–50% की कमी लाएगा। परिवहन-अर्थशास्त्र के अनुसार, यात्रा-समय में कमी से लॉजिस्टिक्स लागत घटती है, जो भारत में वर्तमान में GDP का लगभग 13–14% आँकी जाती है। राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन और गति शक्ति के माध्यम से इसे 8–9% तक लाने का लक्ष्य है, जिससे निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि होगी।


रामेश्वरम, धनुष्कोडी, मदुरै जैसे धार्मिक-पर्यटन स्थलों की कनेक्टिविटी में सुधार, सांस्कृतिक-पर्यटन को प्रोत्साहन देगा। पर्यटन मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार, धार्मिक पर्यटन भारत के घरेलू पर्यटन का एक बड़ा हिस्सा है। बेहतर सड़कों और रेल नेटवर्क से स्थानीय MSME, होटल, हस्तशिल्प और परिवहन सेवाओं को प्रत्यक्ष लाभ होगा।


अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत आठ रेलवे स्टेशनों का पुनर्विकास, यात्री-केंद्रित अवसंरचना के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। आधुनिक प्रतीक्षालय, लिफ्ट, एस्केलेटर, दिव्यांगजन-सुलभ सुविधाएँ, और स्थानीय स्थापत्य का समावेशन—यह सांस्कृतिक पहचान और आधुनिकता का संतुलन है। चेन्नई बीच–चेन्नई एग्मोर चौथी लाइन, उपनगरीय रेल नेटवर्क की परिचालन क्षमता बढ़ाएगी। चेन्नई महानगर, जो आईटी और औद्योगिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है, वहाँ उपनगरीय रेल की दक्षता में वृद्धि, श्रम-गतिशीलता और शहरी उत्पादकता को सुदृढ़ करेगी।आकाशवाणी एफएम रिले ट्रांसमीटरों का उद्घाटन, सूचना-प्रसार और सांस्कृतिक एकीकरण का माध्यम है। डिजिटल युग में भी सार्वजनिक प्रसारण, आपदा-संचार और ग्रामीण क्षेत्रों में विश्वसनीय सूचना का स्रोत है। कोविड-19 काल में सार्वजनिक प्रसारण की भूमिका ने सिद्ध किया कि विश्वसनीय सूचना तंत्र, सामाजिक स्थिरता के लिए अनिवार्य है।


अंततः, तिरुपरंकुंद्रम स्थित अरुलमिगु सुब्रमणियस्वामी मंदिर में दर्शन और पूजा, भारत के विकास-चिंतन में सांस्कृतिक-आध्यात्मिक आयाम की उपस्थिति को रेखांकित करता है। यह दर्शाता है कि आधुनिक अवसंरचना और प्रौद्योगिकी-आधारित विकास, भारत की सभ्यतागत चेतना से पृथक नहीं है। सांस्कृतिक आत्मविश्वास और आर्थिक प्रगति, परस्पर विरोधी नहीं बल्कि पूरक हैं।

इस सम्पूर्ण परिदृश्य में स्पष्ट है कि तमिलनाडु और पुडुचेरी की यह यात्रा, भारत की बहु-स्तरीय विकास रणनीति—हरित परिवहन, डिजिटल शासन, स्वास्थ्य-सुदृढ़ीकरण, औद्योगिक क्लस्टर, तटीय पारिस्थितिकी संरक्षण, लॉजिस्टिक्स सुधार, और सांस्कृतिक सशक्तिकरण—का समेकित उदाहरण है। यह एक ऐसे भारत की परिकल्पना को मूर्त रूप देती है जो वैज्ञानिक दृष्टि, आर्थिक यथार्थवाद और राष्ट्रीय आत्मगौरव के संतुलन पर आधारित है; जहाँ अवसंरचना केवल निर्माण नहीं, बल्कि राष्ट्र-निर्माण का साधन है; और जहाँ क्षेत्रीय विकास, राष्ट्रीय उत्थान की आधारशिला बनता है।






अपने प्रियजनों से पूछे "क्या आप जानते हैं?"

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तरी (Quiz)


निर्देश: निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर स्रोत के आधार पर 2-3 वाक्यों में दें।

  1. प्रधानमंत्री की तमिलनाडु और पुडुचेरी यात्रा का व्यापक दृष्टिकोण क्या है?

  2. पुडुचेरी में 'समेकित कमांड एवं नियंत्रण केंद्र' (ICCC) का क्या महत्व है?

  3. ई-बस पहल भारत की जलवायु रणनीति (NDCs) में कैसे योगदान देती है?

  4. जिपमर (JIPMER) के क्षेत्रीय कैंसर केंद्र के आधुनिकीकरण का स्वास्थ्य-अर्थशास्त्र पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

  5. करासुर-सेदारापेट औद्योगिक एस्टेट किस सिद्धांत पर आधारित है और इसके घटक क्या हैं?

  6. प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के अंतर्गत 41 ग्रामीण सड़कों के निर्माण का मुख्य उद्देश्य क्या है?

  7. तटीय पारिस्थितिकी के संदर्भ में 'मिष्टी' (MISHTI) योजना की वैज्ञानिक उपयोगिता क्या है?

  8. प्रधानमंत्री गति शक्ति मास्टर प्लान के तहत राजमार्गों के चौड़ीकरण से लॉजिस्टिक्स लागत पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

  9. अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास में किन दो पहलुओं का संतुलन रखा गया है?

  10. तिरुपरंकुंद्रम मंदिर की यात्रा भारत के विकास-चिंतन के किस आयाम को रेखांकित करती है?


उत्तर कुंजी (Answer Key)

  1. यह यात्रा केवल प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत के अवसंरचनात्मक पुनरुत्थान, हरित-प्रौद्योगिकी, और सांस्कृतिक आत्मविश्वास की अभिव्यक्ति है। इसका उद्देश्य अवसंरचना को उत्पादकता, मानवीय पूंजी और क्षेत्रीय संतुलन के आधार के रूप में स्थापित करना है।

  2. ICCC शहरी शासन को डेटा-संचालित बनाता है, जिससे रियल-टाइम सीसीटीवी विश्लेषण, आपदा प्रबंधन और यातायात नियंत्रण संभव होता है। यह पुडुचेरी जैसे चक्रवात-संभावित क्षेत्रों में आपदा-जोखिम न्यूनीकरण (DRR) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

  3. ई-बसें ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने का एक व्यावहारिक साधन हैं, जो अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार शहरी उत्सर्जन में 30–40% तक की कमी ला सकती हैं। यह भारत के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDCs) और हरित-प्रौद्योगिकी संक्रमण के लक्ष्यों के अनुरूप है।

  4. आधुनिकीकरण से कैंसर के समय पर निदान और उपचार में सुधार होगा, जिससे 'रोग-भार' (DALYs) में कमी आएगी। यह उत्पादक कार्य-घंटों की रक्षा करके अंततः देश की जीडीपी (GDP) पर सकारात्मक प्रभाव डालता है।

  5. यह 'क्लस्टर-आधारित औद्योगिकरण' के सिद्धांत पर आधारित है, जहाँ उद्योग, अनुसंधान (IIT मद्रास) और स्वास्थ्य केंद्र भौगोलिक रूप से निकट होते हैं। इसमें फार्मा, टेक्सटाइल और आईटी पार्क शामिल हैं, जो नवाचार और निर्यात क्षमता को बढ़ावा देते हैं।

  6. इन सड़कों का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक गतिशीलता बढ़ाना, कृषि उत्पादों की बाजार तक पहुँच सुगम करना और स्वास्थ्य एवं शिक्षा सेवाओं तक पहुँच में सुधार करना है। यह क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने का एक ढांचागत प्रयास है।

  7. मिष्टी योजना के तहत मैंग्रोव पुनर्स्थापन कार्बन-भंडारण में प्रभावी है और चक्रवातीय तूफानों की तीव्रता को कम करता है। यह तटीय कटाव को रोकने और बंगाल की खाड़ी के चक्रवातों से सुरक्षा प्रदान करने का एक वैज्ञानिक समाधान है।

  8. राजमार्गों के चौड़ीकरण से यात्रा समय में 40–50% की कमी आएगी, जिससे लॉजिस्टिक्स लागत को वर्तमान जीडीपी के 13–14% से घटाकर 8–9% तक लाने का लक्ष्य है। इससे भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि होगी।

  9. इसमें आधुनिक सुविधाओं (जैसे लिफ्ट, एस्केलेटर और दिव्यांगजन-सुलभ पहुँच) और स्थानीय स्थापत्य कला का समावेश किया गया है। यह योजना आधुनिकता और सांस्कृतिक पहचान के बीच एक सटीक संतुलन स्थापित करती है।

  10. यह यात्रा दर्शाती है कि आधुनिक अवसंरचना और प्रौद्योगिकी विकास भारत की सभ्यतागत चेतना से अलग नहीं हैं। यह स्पष्ट करता है कि आर्थिक प्रगति और सांस्कृतिक आत्मविश्वास एक-दूसरे के पूरक हैं।


निबंधात्मक प्रश्न (Essay Questions)

निर्देश: निम्नलिखित विषयों पर विस्तार से विचार करें (उत्तर कमेंट में लिखे )।

  1. "कनेक्टिविटी = उत्पादकता = समृद्धि।" इस समीकरण के आलोक में पुडुचेरी और तमिलनाडु में प्रस्तावित अवसंरचनात्मक परियोजनाओं के आर्थिक प्रभावों का विश्लेषण कीजिए।

  2. शहरीकरण को 'दीर्घकालिक आर्थिक प्रगति का इंजन' बनाने में डिजिटल शासन (ICCC) और समावेशी आवास (CITIIS) की भूमिका पर चर्चा कीजिए।

  3. पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाने में 'मिष्टी योजना' और 'ई-गतिशीलता' जैसे हरित-प्रौद्योगिकी हस्तक्षेपों के महत्व का मूल्यांकन कीजिए।

  4. माइकल पोर्टर के 'क्लस्टर सिद्धांत' के संदर्भ में करासुर-सेदारापेट औद्योगिक एस्टेट के विकास और इसके वैश्विक निर्यात क्षमता पर पड़ने वाले प्रभाव की व्याख्या कीजिए।

  5. भारत के विकास मॉडल में 'सांस्कृतिक आत्मविश्वास' और 'आधुनिक अवसंरचना' के अंतर्संबंधों का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।


शब्दावली (Glossary)

शब्द

परिभाषा

अवसंरचना (Infrastructure)

अर्थव्यवस्था के संचालन के लिए आवश्यक बुनियादी भौतिक और संगठनात्मक संरचनाएँ, जैसे सड़क, बिजली और संचार।

समेकित कमांड एवं नियंत्रण केंद्र (ICCC)

एक डेटा-आधारित तंत्र जो सीसीटीवी, ट्रैफिक और आपदा प्रबंधन के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग करता है।

ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन (GHG Emissions)

वे गैसें जो पृथ्वी के वायुमंडल में गर्मी को रोकती हैं; परिवहन का विद्युतीकरण इन्हें कम करने में सहायक है।

DALYs (Disability-Adjusted Life Years)

बीमारी के कारण खोए गए स्वस्थ जीवन के वर्षों की माप; यह रोग-भार को समझने में मदद करता है।

क्लस्टर-आधारित औद्योगिकरण

एक भौगोलिक क्षेत्र में संबंधित उद्योगों, अनुसंधान संस्थानों और कौशल केंद्रों का एकत्रीकरण ताकि नवाचार को बढ़ावा मिले।

राजकोषीय गुणक (Fiscal Multiplier)

यह अनुपात जो दर्शाता है कि सार्वजनिक निवेश (जैसे ₹1) से अर्थव्यवस्था में कुल कितनी अधिक आर्थिक गतिविधि (जैसे ₹2.5) उत्पन्न होती है।

मिष्टी (MISHTI) योजना

तटीय पारिस्थितिकी की रक्षा के लिए मैंग्रोव वनों के पुनर्स्थापन और संरक्षण हेतु एक विशेष पहल।

लॉजिस्टिक्स (Logistics)

माल को उत्पादन स्थल से उपभोक्ता तक पहुँचाने की योजनाबद्ध प्रक्रिया और प्रबंधन।

सहयोगात्मक संघवाद

केंद्र और राज्यों के बीच विकास कार्यों और नीति कार्यान्वयन में आपसी समन्वय और सहयोग की भावना।

सांस्कृतिक आत्मविश्वास

अपनी सभ्यतागत विरासत और मूल्यों पर गर्व करते हुए आधुनिक प्रगति के पथ पर आगे बढ़ने की सोच।


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